डी. फार्मा (Diploma in Pharmacy) दो साल का फुल-टाइम कोर्स है। यह भारत में रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बनने का सबसे छोटा मान्यता प्राप्त रास्ता है — और यह अपने आप में एक पूरी योग्यता है, किसी बड़ी डिग्री की तैयारी भर नहीं।
इसका व्यावहारिक अर्थ यह है: इसी डिप्लोमा के आधार पर स्टेट फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रेशन देती है, और रजिस्ट्रेशन के बाद ही कोई व्यक्ति कानूनी रूप से प्रिस्क्रिप्शन दवाइयाँ दे सकता है। बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट के कोई मेडिकल स्टोर नहीं चल सकता।
दो साल के कोर्स में 11 विषय हैं, जिनमें से 10 में प्रैक्टिकल परीक्षा होती है। इनमें चार मुख्य विषय हैं — फार्मास्युटिक्स, फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोग्नोसी और फार्माकोलॉजी — और संस्थान में हर एक का अपना विभाग और अपनी प्रयोगशाला है।
योग्यता: 12वीं (इंटरमीडिएट) में फिजिक्स और केमिस्ट्री के साथ बायोलॉजी या मैथ्स होना ज़रूरी है। दोनों में से कोई भी संयोजन मान्य है; JEECUP में बायोलॉजी वाले छात्र ग्रुप E1 और मैथ्स वाले ग्रुप E2 में आवेदन करते हैं। कॉमर्स या आर्ट्स से 12वीं करने वाले छात्र इसके लिए पात्र नहीं होते — यह नियम कॉलेज का नहीं, नियामक का है।
उत्तर प्रदेश में प्रवेश JEECUP काउंसलिंग के माध्यम से होता है। काउंसलिंग पंजीकरण के 250 रुपये और सीट स्वीकार करने के 3,000 रुपये JEECUP को दिए जाते हैं, कॉलेज को नहीं।
बनारस इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, वाराणसी में इस कोर्स की फीस 60,000 रुपये प्रति वर्ष है, यानी दो वर्षों में 1,20,000 रुपये। संस्थान फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुमोदित और बोर्ड ऑफ टेक्निकल एजुकेशन, उत्तर प्रदेश से संबद्ध है, और यहाँ 60 सीटें हैं (EWS कोटा सहित 66)।
कोर्स के बाद आप रिटेल या अस्पताल की फार्मेसी में काम कर सकते हैं, दवा उद्योग में उत्पादन और गुणवत्ता नियंत्रण में जा सकते हैं, या बी. फार्मा में आगे पढ़ाई जारी रख सकते हैं। किसी भी जानकारी के लिए 7706033222 पर कॉल करें।
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